Answer :

समाज में रिश्तों की अहमियत काफी है। यह रिश्तों की ही डोर है जो हमें समाज में स्थापित करती है। मनुष्य की प्रथम पहचान उसके माता-पिता संसार से कराते हैं। शायद ही कोई ऐसा मनुष्य होगा जो अपने माता-पिता से अलग पहचान रखकर इस धरती पर आया हो। साथ में संतान अपने माता-पिता के गुणों की विरासत अपने व्यक्तित्व में उपस्थित पाता है। वास्तव में रिश्तों के बंधन में बंधने का प्रारंभ यहीं से प्रारंभ होता है। हम आंखें खोलने पर अपने आसपास रिश्तों की भरमार पाते हैं। वास्तव में हममें से अधिकांश लोग इन्हीं रिश्तों को खुश करने का प्रयास जीवन भर करते हैं और बदले में हमारे यही रिश्तेदार हमें वही खुशी लौटाने का प्रयास करते हैं। हम अपनी उन्नति का प्रयास भी इन्हीं रिश्तों के बीच हमारी लाज या हमारा मान सुरक्षित रखने हेतु ही करते हैं। हम कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते हैं जिससे कि हमारा नाम इन रिश्तों के बीच बदनाम हो। कभी-कभी हमारी अपनी गलती या किसी अन्य की गलती से पारिवारिक या सामाजिक रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है। कभी-कभी लोग अपने कुकृत्य मे रिश्तों की परवाह नहीं करते और रिश्तों की मर्यादा को लांघ जाते हैं पर इस प्रकार के कार्य से समाज में रिश्तों की अहमियत कम नहीं होती। समाज में रिश्ते हमेशा पुल बनकर सामाज के लोगों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। जिस देश में सामाजिक रिश्ते जितने अधिक सौहाद्रपूर्ण होंगे वहां उतना ही अधिक शांतिपूर्ण माहौल होगा और वह देश उतना ही अधिक प्रगतिशील होगा।


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