Answer :

जगजीत सिंह गजल


- होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो।


-चिट्ठी ना कोई संदेश, जाने वो कौनसा देश जहां तुम चले गए।


-कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे, तुने आँखों से कोई बात कही हो जैसे


गुलाम अली


- हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह, सिर्फ इक बार मुलाकात का मौका दे दे, हम तेरे शहर में...


पंकज उधास


-चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है


-चाँदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल


-न कजरे की धार, न मोतियों का हार


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