Q. 12 A4.7( 7 Votes )

निम्नलिखित

Answer :

                                                                                 आपदा प्रबंधन 
प्रस्तावना- प्रकृत्ति पर आपदा आना कोई नई बात नहीं है। ये बिन बुलाए मेहमान की तरह कभी भी आ जाती है और धरती पर जान-माल का नुकसान करती है। ये आपदाएं इसलिए आती हैं क्योंकि लगातार प्रकृत्ति का दोहन हो रहा है इसलिए संतुलन बिगड़ गया है। मनुष्य अपने निजि स्वार्थ के लिए धरती को नुकसान पहुंचा रहा है। उसी का परिणाम पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाओं का आगमन होता है।


प्राकृतिक आपदाएं- समय के साथ ये आपदाएं और भी विकराल रूप लेती जा रही हैं। मानव को इस समय कई प्राकृत्तिक आपदाओं से जूझना पड़ता है। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं


जंगलो में आग


आंधी


बाढ़, मूसलाधार बारिश


बिजली गिरना


सूखा (अकाल)


महामारी


हिमस्खलन


भूकम्प


ज्वालामुखी


सुनामी


चक्रवाती तूफान


बादल फटना


ओलावृष्टि


हीट वेव आदि


दोषी कौन- प्राकृत्तिक आपदाओं के आने का कारण पृथ्वी का संतुलन बिगड़ना है। ये संतुलन मानव जाति की वजह से बिगड़ा है। अपने फायदे के लिए लोग जंगलों को काटकर बिल्डिंग बना रहे हैं। रास्ता बनाने के लिए पहाड़ों को काट रहे हैं। अपनी सुख—सुविधा के लिए पेट्रोल वाली कार—मोटरसाइकिल का प्रयोग कर रहे हैं। बड़ी—बड़ी फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं भी वायु को प्रदूषित करता जा रहा है। भारत देश में गंदगी भी आपदा का बड़ा कारण हो सकती है। प्रकृत्ति को जितना नुकसान पहुंचाएंगे तो प्रकृत्ति भी अपना प्रभाव जरूर दिखाएगी।


सरकार की जिम्मेदारी- आपदा आने से पहले ही सरकार को अलर्ट जारी कर देना चाहिए जिससे ज्यादा जान-माल का नुकसान ना हो। इसके लिए लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। आपदा के पूर्वानुमान की व्यवस्था होनी चाहिए। अगर आपदा आ जाती है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रभावित जगहों पर नर्स, खाना, डॉक्टर्स और लोगों के रहने की व्यवस्था कर देनी चाहिए। आपदाग्रस्त क्षेत्रों की भौगोलिक एवं आर्थिक स्थितियों के कारण चुनौती और भी बढ़ जाती है।


नागरिकों के कर्तव्य- देश के नागरिक होने के नाते हमारा ये कर्तव्य बनता है कि हम इस धरती को बिगाड़ने का नहीं बल्कि संवारने का काम करें। पेड़ों को काटने से बचें। ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं। कार-मोटरसाइकिल का उपयोग कम से कम करें। अपने आस-पास के क्षेत्र को साफ रखें।


उपाय-आपदा प्रबंधन का पहला चरण है खतरों की पहचान। इस अवस्था पर प्रकृति की जानकारी होनी जरूरी है। इसके अलावा बढ़ती आबादी भी आपदा का बहुत बड़ा कारण है। ऐसे में लोगों को परिवार नियोजन की परियोजनाओं के बारे में बताया जाना चाहिए। भौतिक खतरों का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक और उपकरण का इंतजाम होना भी जरूरी है।

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