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क) स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत का उद्देश्य सरकार द्वारा देश को स्वच्छता के प्रतीक के रुप में पेश करना है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गाँधी के द्वारा देखा गया था जिसके संदर्भ में गाँधीजी ने कहा कि, ”स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरुरी है”| उनके अपने समय में वो देश की गरीबी और गंदगी से अच्छे से अवगत थे इसी वजह से उन्होंने अपने सपनों को पाने के लिये कई सारे प्रयास किये, लेकिन सफल नहीं हो सके। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्‍मा गांधी के स्‍वच्‍छ भारत के स्‍वप्‍न को पूरा करने के लिए इस मिशन को अपने प्रारंभ की तिथि से बापू की 150वीं पूण्यतिथि (2 अक्दूबर 2019) तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस अभियान को सफल बनाने के लिये सरकार ने सभी लोगों से निवेदन किया कि वो अपने आसपास और दूसरी जगहों पर साल में सिर्फ 100 घंटे सफाई के लिये दें। इसको लागू करने के लिये बहुत सारी नीतियाँ और प्रक्रिया है जिसमें तीन चरण है, योजना चरण, कार्यान्वयन चरण, और निरंतरता चरण।

स्वच्छ भारत अभियान - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है का उद्देश्य केवल आसपास की सफाई करना ही नहीं है अपितु नागरिकों की सहभागिता से अधिक-से अधिक पेड़ लगाना, कचरा मुक्त वातावरण बनाना, शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराकर एक स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अस्वच्छ भारत की तस्वीरें भारतीयों के लिए अक्सर शर्मिंदगी की वजह बन जाती है इसलिए स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि सुधारने का यह सही समय एवं अवसर है। यह अभियान न केवल नागरिकों को स्वच्छता संबंधी आदतें अपनाने बल्कि हमारे देश की छवि स्वच्छता के लिए तत्परता से काम कर रहे देश के रूप में बनाने में भी मदद करेगा।


ख) विविधता में एकता भारत की प्रमुख विशेषता है। उक्त विविधताओं को सम्मान एवं उचित महत्त्व देने के लिए हमारे संविधानविदों ने संविधान में अनेक ऐसे प्रावधान किये थे जिनके माध्यम से हम अपने देश की विविधता को संरक्षित रख सकें| लेकिन विवध संस्कृतियों के इस अद्भुत सामंजस्य को देखकर बहुत से देश निस्तबद्ध रह जाते हैं। इसे देखकर उन्हें ऐसा लगता हैं कि इतनी विविध संस्कृतियों, धर्मो और जातियों के लोग एक साथ एक राष्ट्र, राज्य, शहर में शांतिपूर्ण तरीके से कैसे रह सकते हैं और इसी कारण से कई बार कुछ बाहरी राष्ट्रों द्वारा जिन्हें हमारी संस्कृति पसंद नहीं है| वे इस देश के एकीकरण को तोडकर देश को बिखेरना चाहते हैं। हिंसापूर्वक आम लोगों को सीधे डराने के लिये आतंकवाद का एवं अन्य कई गतिविधियों का प्रयोग उन देशों के द्वारा किया जाता है| वर्तमान में हर समय वास्तव में लोग आतंकवाद और आतंकवादी हमलों से डरते रहते हैं। बहुत आसानी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये विभिन्न सामाजिक संगठन, राजनीतिज्ञ और व्यापारिक उद्योगों के द्वारा आतंकवाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का समूह जो नागरिकों पर हिंसा के प्रयोग, मार-काट एवं इसी प्रकार की अन्य गतिविधियों का समर्थन करते हैं उन्हें आतंकवादी कहते हैं। आतंकवाद को परिभाषित करना बहुत आसान नहीं है क्योंकि इसने अपनी जड़ें बहुत गहराई तक जमायी हुयी है। ये समाज और देश में आतंक के स्तर को बढ़ाने और अपने मुद्दों को मनवाने के लिये केवल हिंसात्मक गतिविधियों का सहारा लेते हैं।


आतंकवाद के उत्पन्न होने के मूल कारण हैं गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, और धार्मिक उन्माद। आतंकवाद की गतिविधियों को सबसे अधिक प्रोत्साहन धार्मिक कट्टरता से मिलता है। लोग धर्मों के नाम पर एक-दूसरे का गला काटने से भी पीछे नहीं हटते हैं। आतंकवादियों का मूल उद्देश्य अधिक से अधिक हिंसा फैलाकर लोगों के मन में भय उत्पन्न करना ताकि वे अपनी आवाज बुलंद न कर सकें| धर्म के विपक्षी लोग धर्म मानने वाले लोगो को सहन नहीं कर पाते हैं।


आतंकी समूह को खत्म करने के साथ ही आतंक के खिलाफ लड़ने के लिये हर साल हमारा देश ढ़ेर सारे पैसे खर्च करता है। हालाँकि आतंकवाद समाज में एक गंभीर बीमारी की तरफ लगातार अपनी जड़ें जमा रहा है जोकि हम प्रतिदिन आने वाली आतंकवादी गतिविधियों से समझ सकते हैं| वो हमारी तरह ही बहुत सामान्य लोग हैं लेकिन उन्हें अन्याय करने के लिये तैयार किया जाता है और अपने ही समाज, परिवार और देश के खिलाफ लड़ने के लिये दबाव बनाया जाता है। वो इस तरह से प्रशिक्षित होते हैं कि उन्हें अपने जीवन से भी प्यार नहीं होता, वो लड़ते समय हमेशा अपने आपको करने के लिये तैयार रहते हैं। एक भारतीय नागरिक के रुप में, आतंकवाद को रोकने के लिये हम सभी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और ये तभी रुकेगा जब हम एक समाज और नागरिक के तौर पर हिंसा को बिलकुल भी स्वीकार नहीं करेंगे और किसी भी प्रकार से इसको बढ़ावा देने में अपना सहयोग नहीं देंगे|


ग) साक्षी मलिक का जन्म 3 सितम्बर 1992 को मोखरा गाँव के रोहतक जिला,हरियाणा में हुआ था. इनके पिता का नाम सुखबीर मलिक है, जो दिल्ली ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में कंडक्टर है. साक्षी की माँ सुदेश मलिक एक आंगनबाड़ी में काम करती है. साक्षी को बचपन से ही रेसलिंग से लगाव था, साक्षी के दादा जी बध्लू राम भी एक रेसलर थे, इन्ही को देखकर साक्षी के मन में भी रेसलर बनने की बात आई थी. साक्षी ने अपनी पढाई की शुरुवात रोहतक के वैश्य पब्लिक स्कूल से पूरी की थी, इसके बाद वे रोहतक के DAV पब्लिक स्कूल भी गई. साक्षी ने अपने कॉलेज की पढाई रोह्तक के मह्रिषी दयानंद यूनिवर्सिटी से की थी.


साक्षी की माँ उसको एक एथलीट बनाना चाहती थी, उनके हिसाब से रेसलिंग पुरुषों का खेल था, जिसे लड़कियां नहीं खेल सकती थी. एक बार वे गर्मियों में साक्षी को छोटू राम स्टेडियम ले गई, वहां वे चाहती थी कि साक्षी कुछ फिजिकल एक्टिविटी करे, लेकिन साक्षी ने वहां कुश्ती को चुना और उसके गुर सिखने लगीं. शुरू में ये बात सुन उनकी माँ इस फैसले से खुश नहीं थी, लेकिन फिर अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए वे मान गई.


रियो ओलंपिक में जाने के लिए साक्षी को मई 2016 में इन्स्ताबुल में वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में भाग लेना पड़ा. यहाँ उन्होंने चाइना की जहाँग लेन को हराकर रियो ओलंपिक में अपने जाने के रास्ते खोल दिए. यहाँ ओलंपिक में उन्होंने सबसे पहले स्वीडन के खिलाफ मैच जीता, फिर माल्डोवा के खिलाफ मैच जीता.


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