Answer :

(क) हँसी भीतरी आनंद का बाहरी चिह्न है| शरीर को अच्छा रखने की अच्छी से अच्छी दवा एक बार खिलखिला उठना है| जब मन प्रसन्न होता है तो चेहरे पर मुस्कुराहट या हंसी अपने आप जाती है। इसीलिये यह कहा जा सकता है कि हंसी भीतरी आनंद को प्रकट करती है|


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पुराने लोग कह गए हैं कि हँसो और पेट फुलाओ| हँसी कितने ही कला-कौशलों से भली है| जितना ही अधिक आनंद से हँसोगे उतनी ही आयु बढ़ेगी और शरीर स्वस्थ रहेगा। अतः हंसने से मानसिक और शारीरिक शान्ति मिलने के कारण पुराने लोगों ने हँसी को अत्याधिक महत्त्व दिया|


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आनंद अथवा खुशी जिसकी अभिव्यक्ति व्यक्ति के हंसने से होती है एक ऐसा प्रबल इंजन है कि जिससे हम शोक और दुख की दीवारों को ढा सकते हैं| प्राण के लिए सब देशों में उत्तम-से-उत्तम उपाय मनुष्य के चित्त को प्रसन्न रखना है| सुयोग्य वैद्य अपने रोगी के कानों में आनंदरूपी मंत्र सुनाता है|


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लेखक ने बताया कि सदा अपने कर्मों पर खीझने वाला हेरिक्लेस बहुत कम जिया, पर प्रसन्न मन डेमाक्रीट्स 109 वर्ष तक जिया| इससे पता चलता है कि जो लोग खुश रहते हैं वो ज्यादा समय तक जीते हैं और दुखी रहने वालों की आयु कम होती है।


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इस गद्यांश में खुशी जीवन जीने के बारे में बताया गया है। इस हिसाब से इसका उचित शीर्षक होना चाहिए खुशी की खुराक अथवा हँसी का जीवन में महत्त्व|


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