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Answer :

क) स्त्री शिक्षा के विरोध में यह तर्क इसलिए दिया जाता है क्योंकि पुराने जमाने में यहां कि स्त्रियां पढ़ी लिखी नहीं होती थीं और उनके पढ़ने पर भी रोक थी। ऐसे वे इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्हें इतिहास के बारे जानकारी नहीं है। अगर इतिहास का ठीक से अध्ययन किया जाए तो हम पायेंगे कि अतीत में स्त्रियाँ भी शिक्षा ग्रहण करती थीं|


ख) अनर्थ का मूल स्त्रोत व्यक्ति के चरित्र में होता है। कुसंस्कार, कुसंगति, कुत्सित विचार व्यक्ति को अनर्थ करने के लिए प्रेरित करते हैं।


ग) समाज की दृष्टि में स्त्री शिक्षा के विरोधी दंडनीय इसलिए हैं क्योंकि वे स्त्रियों को निरक्षर रखने का उपदेश देकर समाज में स्त्रियों के लिए गलत माहौल का निर्माण करते हैं और स्त्रियों को आत्मविकास करने से भी रोकते हैं| किसी समाज का विकास तभी संभव है जब समाज के सभी अंगों स्त्री-पुरुष दोनों का विकास हो अगर स्त्रियों को आत्म विकास का मौका नहीं दिया जाएगा तो समाज का विकास भी संभव नहीं है| अतः ये लोग मात्र स्त्रियों के विकास के ही खिलाफ नहीं हैं बल्कि समाज के विकास के खिलाफ भी हैं|


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