Answer :

) आज मानव जाति के अंदर हर चीज में अपनी हिस्सा मांगने की आदत पड़ गई है| मनुष्य ने पृथ्वी पर उपस्थित प्रत्येक बस्तु पर अपना अधिकार जमा लिया है और फिर आपस में प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की लड़ाई लड़ता रहता है| मनुष्य ने पृथ्वी पर जीवों, जमीन, संसाधनों को देश, राष्ट्र, राज्य एवं गाँव की सीमाओं में बाँट दिया है| इसी वजह से आज घरों का बंटवारा भी आसानी से हो जाता है। अपने स्वार्थ के लिए मनुष्य ने पृथ्वी और उसके जीवों तक का बंटवारा कर डाला है। जबकि इस पृथ्वी पर मनुष्य का कुछ भी नहीं सारे संसाधनों सिर्फ उसके जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए हैं नकि उसकी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए|


) अतीत में पूरा परिवार एक साथ मिलकर रहता था। आज मनुष्यों ने घर और परिवार दोनों के टुकड़े कर दिए हैं। परिवार के लोगों में ही आपसी मतभेद रहने लगा है। मुनष्य ने सभी को उसके रंग, रूप, आकार और स्वभाव के आधार पर बांट दिया है।


) भगवान ने जब धरती बनाई थी तब यहां सब मिलजुलकर रहते थे। हर प्राणी के पास समान अधिकार था। कोई भी एक व्यक्ति प्रकृति को अपनी जागीर नहीं समझता था| सभी पृथ्वी पर एक परिवार की तरह रहते थे और पृथ्वी पर उपस्थित संसाधनों का उपयोग सिर्फ अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए करते थे| लेकिन वर्तमान में स्थिति में परिवर्तन आ गया है| अब मनुष्य ने पृथ्वी पर उपस्थित प्रत्येक बस्तु पर अपना अधिकार ज़माना शुरू कर दिया है| हमें फिर से उसी तरह रहना शुरू करना पड़ेगा तभी पृथ्वी पर एक संतुलन की स्थिति बन पाएगी और अगर हम ऐसा नहीं करते तो कुछ लोगों को पास बहुत अधिक संसाधन हो जायेंगे जबकि कुछ लोग आधारभूत जरूरतों से भी वंचित हो जायेंगे| इसीलिये पृथ्वी पर हमें एक परिवार की तरह रहना चाहिए|


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