Answer :

कामचोर कहानी हमें अपने बच्चों को नौकरों का आदी न होने का संदेश देती है। यह बात सच है कि हमें बचपन से ही अपने बच्चों को छोट-छोटे घरेलू कामों की आदत डालनी चाहिए। इससे न सिर्फ वे मेहनती बनेंगे, बल्कि दैनिक कार्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझेंगे। अगर हम शुरू से ही बच्चों को छोट-मोटे कामों के लिए न टोकें तो आगे चलकर कामचोरी उनके व्यवहार में शामिल हो जाएगी। ऐसे बच्चे भविष्य में अपने माता-पिता का सहारा बनने की बजाये उन पर बोझ बन जाएंगे। माता-पिता के लाड़-प्यार से पले बच्चे अक्सर आगे चलकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझने में मात खा जाते हैं और जीवन में परेशानियों से घबरा जाते हैं|


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