Q. 124.3( 7 Votes )

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

क) परशुराम की स्वाभावगत विशेषताएँ क्या हैं? पाठ के आधार पर लिखिए।

ख) 'साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है' - इस कथन के आधार पर अपने विचार 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संबाद' -पाठ के आलोक में लिखिए।

ग) 'कन्यादान' कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक-भ्रम क्यो कहा गया है?

घ) 'कन्यादान' कविता में माँ बेटी को ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

ङ) संगतकार की आवाज में एक हिचक सी क्यों प्रतीत होती है?

Answer :

क) परशुराम की स्वभावगत विशेषताएं निम्नलिखित हैं-


- परशुराम स्वभाव के अति क्रोधी थे।


- सभी जानते थे कि वे क्षत्रिय वंश के प्रति द्रोही थे।


- वह सहस्रबाहु जैसे अपार बलशाली की भुजाओं को काट देने वाले पराक्रमी वीर थे।


- गुस्सा आने पर वे छोटे-बड़े में कोई अंतर नहीं करते थे और किसी का भी वध कर देते थे।


ख) विनम्रता का भाव हर एक व्यक्ति में होना आवश्यक है| साहसियों और शाक्तिशालियों में तो विनम्रता का होंना अति आवश्यक है यह उनके गुणों का परिष्कार करती है| कमजोर और कायर व्यक्ति का विन्रम होना उस का गुण नहीं बल्कि मजबूरी होती है। ऐसे व्यक्ति किसी का क्या ही बिगाड़ सकते हैं लेकिन कोई शक्तिशाली यदि अपनी शक्ति का दुरुपयोग न करके जब दीन-दुखियों के प्रति विनम्रता प्रकट करता है तो सारे समाज द्वारा उसकी प्रशंसा की जाती है। साहस और धैर्य मन में उत्पन्न होने वाले ऐसे भाव हैं जो शक्ति मिल जाने पर विपरीत स्थितियों में मानव को विचलित होने से रोक लेते हैं। साहस और धैर्य असमय के सखा है और इन्हें शक्ति की सहायता से बनाकर रखा जाना चाहिए लेकिन उसके साथ विनम्रता का बना रहना भी आवश्यक है। विनम्र व्यक्ति ही किसी के साथहोने वाले अन्याय के विरोध में खड़ा हो सकने का साहस कर सकता है।


ग) शब्दों के भ्रम की तरह ही नारी जीवन भर वस्त्र और आभूषणों के मोह में बंधी रहती है। अकसर बेहतर बस्त्र और आभूषण पहनने वाले लोगों को समाज में प्रशंसा मिलती है और इसी प्रशंसा की चाह में वह भारी संख्या में इनका संग्रहण करती है| इन संसाधनों के लिए वह अकसर दूसरों पर निर्भर हो जाती है और अपनी स्वतंत्रता को खो देती है और जीवन भर बस इसी भ्रम में परतंत्रता पूर्वक जीवन व्यतीत करती रहती है| नारी को इन बस्त्र आभूषणों से आगे निकलकर अपनी स्वतंत्रता को अधिक महत्त्व देना चाहिए और इनके संग्रहण का मोह छोड़ एक बेहतर और स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीना चाहिए|


घ) कविता में मां ने बेटी को ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह लड़कियों पर हो रहे शोषण से अपनी बच्ची को बचाना चाहती थी। कोमलता और शालीनता लड़कियों के गुण होते हैं और इसीलिये माँ कहती है कि इन गुणों का तुममें होना आवश्यक है लेकिन लेकिन साथ वह अपनी बेटी को यह सीख भी देती है कि इतना कमजोर भी नहीं बनना चाहिए कि लोगों का अत्याचार सहन करना पड़े। आज की सामाजिक स्थितियों का सामना करने का उसमें साहस होना चाहिए। इसलिए उसे लड़की जैसी दिखाई नहीं देना चाहिए जिससे कोई सरलता से उसे डरा-धमका न सके और उसका शोषण कर सके|


ङ) संगतकार अपनी आवाज को पूरा खोलकर नहीं गाता क्योंकि उसका कार्य मुख्य गायक का सहयोग करना होता है इसीलिये वह हमेशा ही मुख्य गायक से धीमी आवाज में ही गाता है| वह यह नहीं चाहता था कि उसकी आवाज मुख्य गायक से ऊँची सुनाई दे| उसे पता है कि यहि उसकी आवाज तेज होगी तो मुख्य गायक की आवाज का प्रभाव कम हो जाएगा। मुख्य गायक के लिए उसके मन में श्रद्धा है इसलिए उसकी आवाज में एक हिचक सी प्रतीत होती है।


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PREVIOUSनिम्नलिखित काव्यांश के आधाऱ पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-यश है या वैभव है, मान है न सरमाया;जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्ण है।जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजनछाया मत छूना मन, होगा दुख दूना।क) 'मृगतृष्णा' से क्या अभिप्राय है, यहाँ मृगतृष्णा किसे कहा गया है?ख) 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' इस पंक्ति से कवि किस तथ्य से अवगत करवाना चाहता है?ग) 'छाया' से कवि का क्या तात्पर्य है?NEXT'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में प्रदूषण के कारण हिमपात में कमी पर चिंता व्यक्त की गई है। प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए हैं? हमें इसकी रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए?
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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

पुराने जमाने में स्त्रियों के लिए कोई विश्वविद्यालय न था। फिर नियमबद्ध प्रणाणी का उल्लेख आदि पुराणों में न मिले तो क्या आश्चर्य ? और, उल्लेख उसका कहीं रहा हो, पर न्ष्ट ह गया हो तो ? पुराने जमाने में विमान उड़ते थे। बताइए उनके बनाने की विद्या सिखाने वाला कोई शास्त्र ! बड़े-बड़े जहाज़ों पर सवार होकर लोग द्वीपांतरों को जाते थे। दिखाइए, जहाज बनाने की नियमबद्ध प्रणाली के दर्शक ग्रंथ! पुराणवादि में वमानों और जह़ाजों द्वरा की गई यात्राओं के हवाले देखकर उनका अस्तित्व तो हम बड़े गर्व से स्वीकार करते हैं, परंतु पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं के नामोल्लेख देखकर भी कुछ लोग भारत की तत्कालीन स्त्रियों को मूर्ख, अपढ़ और गँवार बताते हैं ।


क) पुराणों में नियमबद्ध शिक्षा-प्रणाली न मिलने पर लेखक आश्चर्य क्यों नहीं मानता?


ख) जहाज़ बनाने के कोई ग्रंथ न होने या न मिलने पर लेखक क्या बताना चहता है?


ग) शिक्षा की नियमावली का न मिलना, स्त्रियों की अपढ़ता का सबूत क्यों नहीं है?

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