Answer :

इफ्फन और टोपी शुक्ला अलग-अलग मजहब के थे। इसके बावजूद दोनों पक्के दोस्त थे। उनकी दोस्ती के बीच में मजहब की दीवार नहीं पाई। दोनों प्रेम के अटूट बंधन में बंधे थे। इफ्फन के बिना टोपी अधूरा सा था। जब इफ्फन के पिता का तबादला हुआ तो टोपी बिल्कुल अकेला रह गया था। इसके बाद वो कभी कोई मित्र नहीं बना पाया। आज के समय में ऐसी निस्वार्थ दोस्ती कम ही देखने को मिलती है। अगर ऐसी दोस्ती इस जमाने में हो जाए तो इंसान का जीवन ही बदल जाए। इस स्वार्थी दुनिया में सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल है। वर्तमान समय में ऐसे ही सच्चे और अच्छे लोगों को देश की जरूरत है।


अथवा


हरिहर काका पाठ में जिस महंत का जिक्र किया गया है, वह धूर्त प्रवृत्ति का है। जो गांव वालों पर जुल्म कर उनसे पैसे ऐंठता है। जबकि महंत की भूमिका समाज के लोगों को दिशा दिखाने की होती है। महंत भटके हुए को राह दिखाता है। महंत लोगों को प्रभु का मार्ग बताता है। अच्छे-बुरे समय में लोगों को अपने विचारो से शांति प्रदान करता है। जब हरिहर काका का महंत सीधेसादे गांव वालों को बेवकूफ बनाता था। उनकी संपत्ति हड़प वहां बड़ेबड़े आश्रम तैयार करवाता था। ऐसा व्यक्ति समाज को दिशा कभी प्रदान कर सकता। उल्टा दिशाहीन बना देता है।


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