Answer :

गोपियाँ उद्धव को निम्नलिखित उलाहने देकर उनको आहत करती हैं-

(क) गोपियों ने कमल के पत्ते, तेल की मटकी के उदाहरण से उद्धव को उलाहने दिए है। गोपियाँ कहती हैं कि श्री कृष्ण के साथ रहते हुए भी उद्धव प्रेमरूपी नदी में नहीं उतरे। अर्थात भगवान श्री कृष्ण के साथ रहते हुए भी वह उनके प्रेम से वंचित रहे।


(ख) गोपियाँ कहती हैं, हे उद्धव! हम तुम्हारी तरह बुद्धिमान नहीं हैं, हम लोग भोली-भाली गोपिकाएं हैं। इसलिए हम लोग श्री कृष्ण के प्रेम में उसी प्रकार आकर्षित रहती हैं, जिस प्रकार चीटियां गुड़ के प्रति आकर्षित रहती हैं।


(ग) गोपियाँ कहती हैं, हे उद्धव! तुम्हारा योग-संदेश हम गोपियों के लिए बिलकुल उपयुक्त नहीं हैं।


(घ) गोपियाँ कहती हैं कि जैसे हारिल चिड़िया किसी लकड़ी को सदैव पकड़े रहती है, उसी तरह उन्होंने नंद के नंदन को अपने हृदय से लगाकर पकड़ा हुआ है।


() गोपियाँ कहती हैं कि जब भी वे किसी और की बात सुनती हैं तो वह बात उन्हें किसी कड़वी ककड़ी की तरह लगती है। कृष्ण तो उनकी सुध लेने कभी नहीं आए बल्कि उन्हें प्रेम का रोग लगाकर चले गये।


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