Q. 14.0( 31 Votes )

बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूडि़यों से और बदलू स्वयं कहता है- ‘‘जो सुंदरता काँच की चूडि़यों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?’’ ये पंक्तियाँ बदलू की दो प्रकार की मनोदशाओं को सामने लाती हैं। दूसरी पंक्ति में उसके मन की पीड़ा है। उसमें व्यंग्य भी है। हारे हुए मन से, या दुखी मन से अथवा व्यंग्य में बोले गये वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते।

कुछ व्यंग्य वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते। कुछ व्यंग्य वाक्यों को ध्यानपूर्वक समझकर एकत्र कीजिए और उनके भीतरी अर्थ की व्याख्या करके लिखिए।

Answer :

पाठ से लिए गए कुछ व्यंग्य-वाक्यः


(क) बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूडि़यों से।


इस वाक्य से बदलू की दोहरी मनोदशा के बारे में पता चलता है। इसमें चूड़ियों को मशीनी युग की देन बताया है, जिसकी वजह कई कारीगरों का रोजगार छिन गया और वे बेरोजगार हो


गए। इसलिए यह चूड़ियां मन ही मन बदलू का देख पहुंचा रही हैं।


(ख) जो सुंदरता काँच की चूडि़यों में होती है, लाख की चूडि़यों में कहाँ संभव है?


इस वाक्य में बदलू ने बनावटी सुंदरता पर तंज कसा है। वह कांच से बनी चूड़ियों के प्रति लोगों के आकर्षण को देखते हुए मन ही मन दर्द से तड़प रहा है।


(ग) शहर की बात और है, लला। वहाँ तो सभी कुछ होता है।


इसमें उन्होंने शहरों की संस्कृति पर व्यंग्य किया है। यहां उन्होंने पश्चिमी सभ्यता को अपनाने वाले लोगों पर तंज कसा है और गांव की श्रेष्ठता को उजागर करने का प्रयास किया है, चाहे उन्हें कितना भी पिछड़ा क्यों न समझा जाता हो।


(घ) नाज़ुक तो फिर होता ही है लला !


इस वाक्य में बदलू ने शहर के उन लोगों पर तंज कसा है जो मजबूती और हाथ से बनी चीजों को छोड़कर सुंदर दिखने वाली कमजोर चीजों के पीछे दौड़ रहे हैं।


(ड़) कहा, जाओ शहर से ले आओ।


इस वाक्य में बदलू का दृढ़ व्यक्तित्व झलकता है। वह कम दाम पाने पर ज़मींदार जैसे व्यक्ति का प्रतिरोधा कर सकता है, किंतु दबाव में आकर झुकता नहीं है।


Rate this question :

How useful is this solution?
We strive to provide quality solutions. Please rate us to serve you better.
PREVIOUSहमारे खान-पान, रहन-सहन और कपड़ों में भी बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के पक्ष-विपक्ष में बातचीत कीजिए और बातचीत के आधार पर लेख तैयार कीजिए।NEXT‘बदलू’ कहानी की दृष्टि से पात्र है और भाषा की बात (व्याकरण) की दृष्टि से संज्ञा है। किसी भी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, विचार तथा भाव को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को तीन भेदों में बाँटा गया है- (क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, जैसे-लला, रज्जों, आम, काँच, गाय इत्यादि। (ख) जातिवाचक संज्ञा, जैसे- चरित्र, स्वाभाव, वज़न, आकार आदि द्वारा जानी जाने वाली संज्ञा_ (ग) भाववाचक संज्ञा,जैसे- सुंदरता, नाज़ुक, प्रसन्नता इत्यादि जिसमें कोई व्यक्ति नहीं है और न आकार या वजन, परंतु उसका अनुभव होता है। पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाएँ चुनकर लिखिए।
Try our Mini CourseMaster Important Topics in 7 DaysLearn from IITians, NITians, Doctors & Academic Experts
Dedicated counsellor for each student
24X7 Doubt Resolution
Daily Report Card
Detailed Performance Evaluation
caricature
view all courses
RELATED QUESTIONS :