Q. 1 C44.8( 10 Votes )

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

आँखे आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।

Answer :

ये पंक्तियां उस समय को दर्शाती है जब लेखक संध्या के समय एक कनकौआ लूटने बेतहाशा दौड़ा जा रहा था। उसकी आंखें तो आसमान की ओर थी और मन भी आकाश में विचरते हुए पथिक के समान था जो धीरे-धीरे पतंग की ओर बढ़ रहा था। नीचे आती पतंग पर नजर टिकाए लेखक उसी दिशा में भागा जा रहा था। उसे इधर-उधर से आने वाली किसी भी चीज की कोई खबर नहीं थी। जब अचानक बड़े भाई साहब ने उसका हाथ पकड़ लिया तो उसे होश आया लेकिन इसके बाद जमकर लेखक की फटकार पड़ी।


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क्रियाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-सकर्मक और अकर्मक।

सकर्मक क्रिया- वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा रहती है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं;


जैसे-शीला ने सेब खाया।


मोहन पानी पी रहा है।


अकर्मक क्रिया- वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं;


जैसे-शीला हँसती है।


बच्चा रो रहा है।


नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है- सकर्मक या अकर्मक? लिखिए-


(क) उन्होने वहीं हाथ पकड़ लिया।


(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।


(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही हौगा।


(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगा।


(ड-) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।


(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।

NCERT Hindi - स्पर्श भाग 2