Answer :

आज की पीढी द्वारा प्रकृति के साथ सचमुच में खिलवाड़ किया जा रहा है। हम प्रकृति के अनुपम घटक पहाङों का किस प्रकार गलत ढंग से दोहन कर रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है। हमें लगता है जैसे प्रकृति से जन्मजात दुश्मनी हो कम से कम हमारे द्वारा पहाङों को तोङने, नदियों में कचरा बहाने उन पर कई जगहों पर बाँध बनाकर उनके बहाव को रोकने, वृक्षों की लगातार कटाई से तो यही प्रतीत हो रहा है। साथ में हम वायुमंडल में जहर फैलाकर प्रकृति के क्रोध को निमंत्रित कर रहे हैं। इस प्रकार से मानव प्रकृति के प्रत्येक घटक को हानि पहुँचा रहे है जबकि प्रकृति का प्रत्येक घटक हमारे जीने के लिए मूलभूत है| किसी भी घटक के समाप्त हो जाने अथवा उपयोग करने योग्य न रहने की स्थिति में मानव समाज का जीवन खतरे में पड़ जाएगा| इसे रोकना बहुत आवश्यक है| हम में से प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपना योगदान देना चाहिए| क्योंकि हम में से प्रत्येक इन घटकों का दोहन करता है साथ ही प्रकृति को नुकसान पहुँचाने में भी हमारा बराबर का योगदान है|


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